मेरी कौसानी यात्रा ---एक स्मृति_____________________
आज प्रकृति को जब इतने करीब से देखा तो मन मयूर नाच उठा ,कौसानी कहते ही सुमित्रानंदन पन्त की याद जेहन में आ जाती है वह कवि बने तो इसमें उनकी प्रकृति और उनके वातावरण का बहुत बड़ा हाथ रहा यह शैल
पताकाएं ,चारों तरफ़ प्राकृतिक उपादान ,अनंत गहराई तक फैले पेड़ और हरियाली ,दूर आकाश में उगता सूरज मानों अपनी तरफ़ खींच रहे हैं ,मन करता है कि यहीं बैठकर जीवन की सम्पूर्ण इच्छाए पूरण करूं बैजनाथ जी के मन्दिर जाते समय रास्ते का आच्छादित जंगल मन को मोह गया हालाकि रिसोर्ट होटल से मानव को सुविधा मिल जाती है पर इनके निर्माण से प्रकृति का विच्छेदन होता है हमारी प्राकृतिक सम्पदाएँ इसीलिये विलीन हो रही हैं क्योंकिहम भौतिक सुविधा के लिए सुकुमार प्रकृति का दोहन कर देते हैं आज बहुत दिनों बाद चिडियों की चाह चाहा हट सूनी ,यह कलरव सुने सदियाँ बीत गई ,-क्यों नहीं यह शब्द शहरों में सुनाई देते हैं ,क्योंकि हमारे शहर मोटर ,मशीन के शब्दों के आदी हो गए हैं ,हमें विचार करना होगा कि हमसे कहाँ चूक हो रही है ,कहीं एसा न हो कि हमसे देर हो जाए
चाय के बागान में उनके गुच्छों को देखकर मन प्रमुदित हो गया ,यह प्रकृति का हमें उपहार है कि एक ही स्थान पर हमें अनेक प्रकार का सौन्दर्य मिलता है ,हम प्रकृति का धन्यवाद तक नही करते हैं रे मानव -तू सावधान हो जा ,जो प्रकृति तेरा पोषण करती है तू उसका संचरण कर ,इसे संभाल कर रख इस पर अपने स्वार्थ की लाठी न चला
सदा अपनों ने ही अपनों को गिराया है ,
विभीषण ने ही लंका को धाया है
उतना नहीं खाया वन के जीवों ने
जितना आदमी ने जंगल को खाया है

very nice...
जवाब देंहटाएंmaa prakriti ko pranaam !
जवाब देंहटाएंहिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत है........... अच्छी जानकारी देने के लिए धन्यवाद्.
जवाब देंहटाएंnice one. narayan narayan
जवाब देंहटाएंस्वागत है.शुभकामनायें.
जवाब देंहटाएंसदा अपनों ने ही अपनों को गिराया है ,
जवाब देंहटाएंविभीषण ने ही लंका को धाया है
उतना नहीं खाया वन के जीवों ने
जितना आदमी ने जंगल को खाया है
well said sir...... nice poem and right message to people........
bahut sundar .blog jagat me swagat hai .
जवाब देंहटाएंकरुणा जी,
जवाब देंहटाएंआपके विचार अच्छे लगे. बस इसी तरह लिखती रहें.
स्वागत है.शुभकामनायें.
जवाब देंहटाएंआप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
जवाब देंहटाएंलिखते रहिये
चिटठा जगत मे आप का स्वागत है
गार्गी
Badee puranee yatra yaad dila dee aapne..!
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