शनिवार, 5 सितंबर 2009

सुख का राज़ --संतुलन

सुख का राज़ जीवन जीने का सही रूप है एक संतुलित जीवन जीना संतुलन हमारे जीवन के सभी क्षेत्र में होना चाहिए --चाहे भावनाओं का संतुलन हो, शारीरिक संतुलन हो ,आर्थिक संतुलन हो ,खान-पान का संतुलन हो ,व्यवहार का संतुलन हो या आध्यात्मिक संतुलन हो किसी भी एक क्षेत्र में संतुलन बिगड़ता है तो जीवन में हलचल और तनाव शुरू हो जाता है व्यवहार तो जीवन पर्यंत चलते हैं पर एक आदर्श जीवन जीना है तो हमें सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन में भी संतुलन करना होगा मन का काम है भटकना पर बुद्धि के द्वारा हम उसे वश में रख सकते हैं शरीर रथ है ,मन घोड़ा है बुद्धि या ज्ञान लगाम हैं ,जिसके द्वारा हम मन को वश में करते हैं अगर हमारा संतुलन ठीक होता है तो हम सुखी जीवन जी पाते हैं यही सुख की कुंजी है ,सफलता का राज़ है एक संतुलन हजार परेशानी दूर करता है अस्तु ..........प्रकृति भी हमें यही संदेश देती है

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